Bhayankar- shayari-अरे हमें तो अपनों ने लूटा,


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अरे हमें तो अपनों ने लूटा,
गैरों में कहाँ दम था.
मेरी हड्डी वहाँ टूटी,
जहाँ हॉस्पिटल बन्द था.
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मुझे जिस एम्बुलेन्स में डाला,
उसका पेट्रोल ख़त्म था.
मुझे रिक्शे में इसलिए बैठाया,
क्योंकि उसका किराया कम था.
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मुझे डॉक्टरों ने उठाया,
नर्सों में कहाँ दम था.
मुझे जिस बेड पर लेटाया,
उसके नीचे बम था.
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मोबाईल एक मंदीर है,

Whatsapp उसका दॆवता,

ग्रुप बनाने वाला पुजारी,

संदॆश भेजनेवाला दानी

पढनेवाला भक्त,

रिप्लाय न करनेवाला मंदीर का भिकारी !
😂😂😂

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